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ओडिसा के मयूरभंज में 20 जून 1958 को एक बालिका का जन्म हुआ। जिनका नाम द्रौपदी मुर्मू रखा गया। उसके परिवार के लोग ग्राम प्रधान रहे। इसलिए जन्म से ही पंचायती राज व्यवस्था और ग्रामीण लोगों के जीवन और उनके जीवन की समस्याओं को करीब से देखने का अवसर उसे मिला। अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाली द्रौपदी मुर्मू राजनीति से जुड़ी रही है। उनकी जीवन यात्रा बहुत कठोर संघर्ष से होकर गुजरी है। इस जाति से नामांकित होने वाली द्रौपदी मुर्मू प्रथम महिला है। 18 जुलाई 2022 को भाजपा ने उन्हें राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रुप में चुना है। वर्तमान राजनैतिक स्थिति को देख कर लगता है कि उनका जीतना लगभग तय है।

एक शिक्षिका के पद से लेकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की राष्ट्रपति पद तक की उनकी यह यात्रा कैसी रही? और उनके जीवन के विषय में उनके ग्रह, सितारें क्या कहते हैं, आज हम इस विषय की ज्योतिषीय विश्लेषण करने जा रहे हैं। द्रौपदी मुर्मू की कई पीडि़यां गांव, समाज की सेवा में निकला। एक आदिवासी जाति से आने के कारण उन्हें सामाजिक कुरितियों और शोषण, अत्याचार का सामना भी करना पड़ा। सफलता के शिखर तक पहुंचने के लिए उन्होंने अनेक असफलताओं और त्रासदियों के मार्ग से होकर गुजरना पड़ा। 1997 में द्रौपदी मुर्मू ने राजनीति में अपना प्रथम कदम रखा और बाद में इन्होंने झारखंड की राज्यपाल का पद भी संभाला। व्यक्तिगत जीवन में भी सुख का अभाव रहा। अपने जीवन साथी को खोने के बाद इन्होंने अपने दोनों बेटों को भी खो दिया। वर्तमान में 2022 के चुनावों में भारत के राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू भाजपा की ओर से नामित है। 21 जुलाई 2022 को इनके राष्ट्रपति पद चुनाव जीतने की पूरी संभावनायें है। आइए देखें कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने की उनकी संभावनाओं के बारे में उनके सितारे क्या कहते हैं।

20 जून 1958,  मयूरभंज, ओडिसा  द्रौपदी मुर्मू जी की कुंडली कर्क राशि की कुंडली है। जिसका स्वामी चंद्र है। चंद्र से बारहवें भाव में सूर्य और बुध की युति बुधादित्य योग का निर्माण कर रही है। द्वितीयेश सूर्य बुध के साथ है। चंद्र कुंडली में नवम भाव पर नवमेश की दृष्टि है, जिससे भाग्य भाव बली हो गया है। इसके अतिरिक्त यहां गुरु आय भाव और सप्तम भाव को भी दॄष्टि दे रहे हैं। सप्तमेश शनि भी तीसरी दृष्टि से सप्तम भाव को बल प्रदान कर रहे है। चतुर्थ भाव पर चतुर्थेश शुक्र की दृष्टि है। यहां भी चतुर्थ भाव बली हो रहा है। पंचमेश मंगल अपने से पंचम भाव में सुस्थित है, जिन्हें गुरु का शुभ प्रभाव प्राप्त हो रहा है। ऐसे में हम देख सकते हैं कि चतुर्थ, सप्तम और नवम भाव अपने भावों के प्रभाव में होने के कारण बली होकर प्रबल हो गये है, कुंडली में ये केंद्र और त्रिकोण भाव है। द्वादश भाव भी अपने स्वामी बुध से युत होने के कारण विशेष बली है।

छ्ठे भाव पर केतु की नवम दृष्टि है, इससे कुंडली में शत्रुओं/विरोधियों को पराजित कर सफल होने की शक्ति आ गई है। इस कुंडली का सप्तम, नवम एकादश, द्वादश भाव विशेष फल देने की स्थिति में है। राजनीति में सफलता के लिए सूर्य और राहु की स्थिति पर खास ध्यान दिया जाता है। यहां राहु चतुर्थ भाव जो आम जन का भाव है, वहां स्थित है, भावेश के प्रभाव में होने के कारण समाज सेवा का भाव इनमें जन्म से रहा। दशम भाव राजनीति और सत्ता का भाव हैं जिस पर राहु की सप्तम दॄष्टि है। राजनीति में सफलता का यह भी एक बड़ा कारण रहा है। कर्क राशि ने इन्हें शांत, संवेदनशील और भावुक स्वभाव दिया। दूसरों के दुखों से जल्द दुखी हो जाना इनके स्वभाव का भाग रहा होगा। द्रौपदी मुर्मू बहादुर और महत्वाकांक्षी हैं। वह जोखिम लेने और अपनी योजनाओं को लागू करने से नहीं डरती, वह एक अत्यंत सक्रिय व्यक्ति है जो दूसरों को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करती है।

इनकी कुंडली पर वर्तमान ग्रह गोचर लगाने पर हम पाते हैं कि शनि मकर राशि में इनके सप्तम भाव पर गोचर कर रहे हैं। बाद में कुंभ राशि में जाने के बाद इनपर शनि ढैय्या का प्रभाव रहेगा। राहु इनके दशम और केतु इनके सप्तम भाव पर गोचर कर रहे हैं। यहां से ये दोनों ग्रह जन्म राहु और केतु पर दृष्टि दे रहे हैं। अष्ट्म भाव पर शनि का गोचर केरियर के लिए तो अच्छा हैं परन्तु स्वास्थ्य के लिए उत्तम नहीं है। गुरु का गोचर इनके इस वर्ष इनके लिए शुभ रहने वाला है। राहु का गोचर इन्हें राजनीति में सफलता के लिए सहयोग कर रहा है। जो आगे भी सहयोग करता