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11 JULY
HARVICK GETS WHAT HE NEEDS, JOHNSON AMONG THOSE

By - आचार्या रेखा कल्पदेव 167 views

कर्म को प्रधान कहा गया। प्राणी के द्वारा जो भी कार्य किया जाता है। उसी को कर्म कहा जाता है। इंसान को कब सफलता प्राप्त होती है। क्या आप जानते है। जब इंसान एक जुट एकाग्र होकर जब किसी भी कार्य को करने मे लग जाता है। तभी उस को सफलता मिलती है। आप ने सुना भी होगा कि करनी और कथनी में अंतर होता है। इस का मतलब यह है। कि आप कर्म तो करते नही और बोलते रहते हो। जैसे कई व्यक्ति कहते है। कि मै बहुत बड़ा धनवान बनना चाहता हुँ। लेकिन वह कर्म करने के लिए आगे नहीं बढ़ता। क्योकि वह व्यक्ति जो धनवान बनने की सोचता है। लेकिन धनवान बनने वाले कर्म (कार्य ) नहीं करता तो कैसे वह धनवान बनेगा।

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Jul 07, 2022

सूर्य क्यों प्रताड़ित करता है ?

सूर्य संपूर्ण जगत अंक पिता एवं आत्मकारक गृह है | सूर्य अपने प्रकाश से संपूर्ण विश्व को प्रकाशित करता है | सूर्य के प्रकाश के कारण ही वृक्ष, फल, फूल, औषधि , व....

Jul 06, 2022

Impure Mind Is The Cause Of All Diseases

Considering 'mind itself as the root of all misfortunes' it has been said – the person whose mind deteriorates, his nature also deteriorates. Ayurveda has not considered germs as the root cause of diseases, but due to mental disorders, germs of disease arise. The seed or sprout of all diseases is hidden within the fear, anger, jealousy, hatred, attachment and aversion prevailing i....

Jul 05, 2022

ज्योतिष में अष्टकवर्ग का महत्व

फलित ज्योतिष में कुंडली के अनुसार फलादेश वर्तमान में ग्रहों की गोचरीय स्थिति का आंकलन के ही फलादेश दिया जाता है लेकिन गोचर पर आधारित फलकथन तब तक अधूरा ....